अपठित बोध » कक्षा 11 से 12 अपठित पद्यांश

अपठित पद्यांश 2

जो अगणित लघु दीप हमारे,
तूफ़ानों में एक किनारे,
जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन,
मांगा नहीं स्नेह मुँह खोल।
कलम, आज उनकी जय बोल।

पीकर जिनकी लाल शिखाएं,
उगल रही सौ लपट दिशाएं,
जिनके सिंहनाद से सहमी,
धरती रही अभी तक डोल।
कलम, आज उनकी जय बोल।

अंधा चकाचौंध का मारा,
क्या जाने इतिहास बेचारा,
साखी हैं उनकी महिमा के,
सूर्य, चन्द्र, भूगोल, खगोल।
कलम, आज उनकी जय बोल।

प्रश्न -1 ‘अगणित लघु दीप हमारे’ – से कवि का क्या अभिप्राय है?

उत्तर – वीर सेनानियों से।

प्रश्न -2 ‘मांगा नहीं स्नेह मुँह खोल’ से क्या अभिप्राय है?

उत्तर – अपने हित साधने के लिए अँग्रेजी सरकार की कृपा स्वीकार करना।

प्रश्न -3 ‘वीर बलिदानियों की महिमा का कौन साक्षी है?

उत्तर – सूर्य, चन्द्र, भूगोल, खगोल।

प्रश्न -4 निम्न में से कौन-सा धरती का पर्यायवाची नहीं है?

व्योम/धरा/वसुधा/रत्नगर्भा

उत्तर – व्योम

प्रश्न -5 धरती के डोलने का क्या कारण है?

उत्तर – वीरों का गर्जन।

प्रश्न -6 इस कविता में कौन-सा रस है?

उत्तर – वीर रस।

प्रश्न -7 ‘अंधा चकाचौंध का मारा’ से कवि का क्या अभिप्राय है?

उत्तर – जो ऐश्वर्य का जीवन जी रहे हैं।

प्रश्न -8 कवि के अनुसार चकाचौंध में अंधा हुआ व्यक्ति क्या नहीं जनता?

उत्तर – इतिहास।

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