कक्षा 11 » अरे इन दोहुन राह न पाई; बालम, आवो हमारे गेह रे – टेस्ट/क्विज

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अरे इन दोहुन राह न पाई।

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अरे इन दोहुन राह न पाई - कबीर

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'औलिया' का अर्थ बताइए।

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अरे इन दोहुन राह न पाई --- पद में ‘दोहुन’ से क्या अभिप्राय है?

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'अरे इन दोहुन राह न पाई।' पद में सखियाँ का क्या अर्थ है?

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'कहैं कबीर सुनों भाई साधो कौन राह ह्नै जाई।।' में कौन-सा अलंकार है?

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अरे इन दोहुन राह न पाई --- पद में कबीर को कौन-सा रूप दृष्ट्व्य है?

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'अरे इन दोहुन राह न पाई।' पद में कबीर के अनुसार दोनों धर्मों में किस प्रकार की कुरीतियाँ हैं?

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'बाहर से इक मुर्दा लाए धोय-धाय चढ़वाई।' पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?

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अरे इन दोहुन राह न पाई --- पद में कबीर ने किसका विरोध किया है?

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'अरे इन दोहुन राह न पाई।' पद में तुकांतता नहीं है? (सत्य/असत्य)

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'अरे इन दोहुन राह न पाई' --- पद में कौन-सा रस है?

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अरे इन दोहुन राह न पाई --- पद में कबीर ने ईश्वर को प्राप्त करने के लिए कौन-सा मार्ग अपनाने का संदेश दिया है?

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अरे इन दोहुन राह न पाई --- पद में ‘साधो’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?

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'मुसलमान के पीर-औलिया मुर्गी मुर्गा खाई।' में कौन-सा अलंकार है?

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'अरे इन दोहुन राह न पाई।' पद में 'जेवन' का ------------ अर्थ नहीं है।

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