राम और सुग्रीव
शब्दार्थ :- ज्येष्ठ – बड़े। चौकस – चौकन्ना। निरंतर – लगातार। विश्वासपात्र – जिस पर विश्वास किया जा सके। गुप्तचर – छिपी हुई सूचना देने वाला। विनम्रता – – झुककर। निश्चित – अवश्य, जरूर। चंगुल – कैद। सांत्वना – तसल्ली। कुपित – क्रोधित। आश्वासन – विश्वास दिलाना। चूक – गलती। विकराल – विशाल।
पाठ का सार
राम और लक्ष्मण का अगला पड़ाव ऋष्यमूक पर्वत था। सुग्रीव का मूल निवास स्थान किष्किंधा था। सुग्रीव किष्किधा के वानरराज के छोटे पुत्र थे। सुग्रीव के बड़े भाई का नाम बाली था। पिता के न रहने पर ज्येष्ठ पुत्र बाली राजा बना। पहले दोनों भाइयों में बहुत प्रेम था। राजकाज में किसी बात को लेकर मनमुटाव हुआ। फिर झगड़ा हो गया। इतना गंभीर किबाली सुग्रीव को मार डालने पर उतर आया। जान बचाने के लिए सुग्रीव को ऋष्यमूक आना पड़ा।
राम और लक्ष्मण को देखकर सुग्रीव भयभीत हो गए। सुग्रीव को लगा कि राम और लक्ष्मण बाली के गुप्तचर हैं। हनुमान राम और लक्ष्मण का पता लगाने के लिए उनके पास गया। हनुमान ने राम और लक्ष्मण से पूछा- “आप दोनों कौन हैं? वन में क्यों भटक रहे हैं? आपका भेस मुनियों जैसा है लेकिन चेहरे से राजकुमार लगते हैं।”
हनुमान के पूछने पर राम ने बताया – हम सुग्रीव से मिलने जा रहे हैं। हमें उनकी सहायता की आवश्यकता है। क्या आप उन्हें जानते हैं। हनुमान ने राम और लक्ष्मण को कंधे पर बैठाया। कुछ ही पल में वे ऋष्यमूक के शिखर पर पहुँच गए।
राम और सुग्रीव ने मित्रता और सुख-दुख में साथ निभाने का वचन लिया। सुग्रीव ने राम को सीता के द्वारा फेंके गए गहनों की पोटली दिखाई। सीता के गहने देखकर राम ने आभूषण तुरंत पहचान लिए। गहने देखकर राम शोक सागर में डूब गए।
सुग्रीव ने राम को अपने विषय में बताया – “बाली ने मुझे राज्य से निकाल दिया है। मेरी स्त्री छीन ली। मेरा वध करने की चेष्टा कर रहा है। संकट के समय हनुमान, नल और नील ने मेरा साथ दिया। मुझे कभी नहीं छोड़ा।” उसने राम से सहायता माँगी।
सुग्रीव द्वारा सहायता माँगे जाने पर राम बोले, “चिंता मत करो मित्र। तुम्हें अपना राज्य भी मिलेगा और स्त्री भी।” राम देखने में सुकुमार थे। उन्हें देखकर उनकी शक्ति का पता नहीं चलता था। सुग्रीव को राम के आश्वासन पर भरोसा नहीं हुआ।
सुग्रीव ने बाली के पराक्रम के विषय में बताया – बाली महाबलशाली है। उसे हराना इतना आसान नहीं है। वह शाल के सात वृक्षों को एक साथ झकझोर सकता है। राम ने कोई उत्तर नहीं दिया। धनुष उठाया और तीर चला दिया। शाल के सातों विशाल वृक्ष एक ही बाण से कटकर गिर पड़े। राम ने सुग्रीव के सामने अपनी शक्ति का प्रदर्शन इस प्रकार दिखाया। इस शक्ति प्रदर्शन पर सुग्रीव ने हाथ जोड़ लिए।
सुग्रीव ने किष्किंधा पहुँचकर बाली को ललकारा। बाली और सुग्रीव में मल्ल युद्ध युद्ध हुआ। राम ने बाली पर बाण नहीं चलाया था। बाली और सुग्रीव देखने में एक जैसे थे, बिना पहचान के बाण सुग्रीव के लग सकता था। राम अपने मित्र को खोना नहीं चाहते थे।
लक्ष्मण ने सुग्रीव को समझाया और राम ने सुग्रीव को कहा कि इस बार बाली को पहचानने में गलती नहीं होगी। बाली को पत्नी तारा ने बाहर जाने से रोका। बाली ने हाथ हवा में उठाया। मुट्ठी भिंची हुई थी। वह एक घूँसे से सुग्रीव का काम तमाम कर देता। तभी राम का बाण उसकी छाती में लगा। वह लड़खड़ाकर गिर पड़ा।
राम के कहने पर बाली के पुत्र अंगद को किष्किंधा का युवराज घोषित किया गया। राम ने सुग्रीव को गद्दी पर बैठाने के बाद वानरराज कहकर पुकारा। सुग्रीव को राम को दिया वचन लक्ष्मण के धनुष की टंकार से प्रकार याद आया। सुग्रीव ने वानरसेना एकत्र करने का काम सेनापति नल को दिया।
वानरों को चार टोलियों में बाँटा गया जामवंत के पीछे पीछे भालुओं की सेना थी। अंगद को दक्षिण जाने वाले अग्रिम दल का नेता बनाया गया। अंगद के दल में नल, नील और हनुमान थे?
राम ने हनुमान को अँगूठी दी। अँगूठी पर राम का चिह्न था। उन्होंने कहा, “जब सीता से भेंट हो तो यह अँगूठी उन्हें दे देना। वे इसे पहचान जाएँगी। समझ जाएँगी तुम्हें मैंने भेजा है। तुम मेरे दूत हो।”
विशाल समुद्र को देखकर देखकर वानर सेना का साहस जवाब दे गया। वानर सेना को जटायु के भाई संपाति ने बताया कि सीता लंका में है। जामवंत के कहने पर हनुमान को लंका की ओर भेजा गया।
पाठ पर आधारित अभ्यास-प्रश्न
प्रश्न :- राम और लक्ष्मण का अगला पड़ाव कहाँ था?
उत्तर :- ऋष्यमूक पर्वत।
प्रश्न :- सुग्रीव का मूल निवास स्थान कौन-सा था?
उत्तर :- किष्किंधा।
प्रश्न :- सुग्रीव कौन थे?
उत्तर :- सुग्रीव किष्किधा के वानरराज के छोटे पुत्र थे।
प्रश्न :- सुग्रीव के बड़े भाई का नाम क्या था?
उत्तर :- बड़े भाई का नाम बाली था।
प्रश्न :- सुग्रीव किष्किंधा छोड़कर ऋष्यमूक पर्वत पर क्यों रहने लगे?
उत्तर :- पिता के न रहने पर ज्येष्ठ पुत्र बाली राजा बना। पहले दोनों भाइयों में बहुत प्रेम था। राजकाज में किसी बात को लेकर मनमुटाव हुआ। फिर झगड़ा हो गया। इतना गंभीर किबाली सुग्रीव को मार डालने पर उतर आया। जान बचाने के लिए सुग्रीव को ऋष्यमूक आना पड़ा।
प्रश्न :- राम और लक्ष्मण को देखकर सुग्रीव भयभीत क्यों हो गए?
उत्तर :- सुग्रीव को लगा कि राम और लक्ष्मण बाली के गुप्तचर हैं।
प्रश्न :- कौन राम और लक्ष्मण का पता लगाने के लिए उनके पास गया?
उत्तर :- हनुमान।
प्रश्न :- हनुमान ने राम और लक्ष्मण से क्या पूछा?
उत्तर :- “आप दोनों कौन हैं? वन में क्यों भटक रहे हैं? आपका भेस मुनियों जैसा है लेकिन चेहरे से राजकुमार लगते हैं।”
प्रश्न :- हनुमान के पूछने पर राम ने ऋष्यमूक आने का क्या कारण बताया?
उत्तर :- हम सुग्रीव से मिलने जा रहे हैं। हमें उनकी सहायता की आवश्यकता है। क्या आप उन्हें जानते हैं?
प्रश्न :- हनुमान राम और लक्ष्मण को किस प्रकार सुग्रीव के पास ले गए?
उत्तर :- हनुमान ने राम और लक्ष्मण को कंधे पर बैठाया। कुछ ही पल में वे ऋष्यमूक के शिखर पर पहुँच गए।
प्रश्न :- राम और सुग्रीव ने किस बात का वचन लिया?
उत्तर :- मित्रता और सुख-दुख में साथ निभाने का।
प्रश्न :- सुग्रीव ने राम को क्या दिखाया?
उत्तर :- सीता के द्वारा फेंके गए गहनों की पोटली।
प्रश्न :- सीता के गहने देखकर राम ने क्या किया?
उत्तर :- राम ने आभूषण तुरंत पहचान लिए। गहने देखकर राम शोक सागर में डूब गए।
प्रश्न :- सुग्रीव ने राम को बाली के विषय में क्या बताया?
उत्तर :- “बाली ने मुझे राज्य से निकाल दिया है। मेरी स्त्री छीन ली। मेरा वध करने की चेष्टा कर रहा है। संकट के समय हनुमान, नल और नील ने मेरा साथ दिया। मुझे कभी नहीं छोड़ा।” उसने राम से सहायता माँगी।
प्रश्न :- सुग्रीव द्वारा सहायता माँगे जाने पर राम ने क्या कहा?
उत्तर :- राम बोले, “चिंता मत करो मित्र। तुम्हें अपना राज्य भी मिलेगा और स्त्री भी।”
प्रश्न :- सुग्रीव को राम से आश्वासन पर भरोसा क्यों नहीं हुआ?
उत्तर :- राम देखने में सुकुमार थे। उन्हें देखकर उनकी शक्ति का पता नहीं चलता
था। सुग्रीव को राम के आश्वासन पर भरोसा नहीं हुआ।
प्रश्न :- सुग्रीव ने बाली के पराक्रम के विषय में क्या बताया?
उत्तर :- बाली महाबलशाली है। उसे हराना इतना आसान नहीं है। वह शाल के सात वृक्षों को एक साथ झकझोर सकता है।
प्रश्न :- राम ने सुग्रीव के सामने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किस प्रकार दिखाया?
उत्तर :- राम ने कोई उत्तर नहीं दिया। धनुष उठाया और तीर चला दिया। शाल के
सातों विशाल वृक्ष एक ही बाण से कटकर गिर पड़े।
प्रश्न :- राम के शक्ति प्रदर्शन से सुग्रीव ने क्या किया?
उत्तर :- इस शक्ति प्रदर्शन पर सुग्रीव ने हाथ जोड़ लिए।
प्रश्न :- सुग्रीव ने किष्किंधा पहुँचकर किसे ललकारा?
उत्तर :- बाली को।
प्रश्न :- बाली और सुग्रीव में कैसा युद्ध हुआ?
उत्तर :- मल्ल युद्ध।
प्रश्न :- राम ने बाली पर बाण क्यों नहीं चलाया था?
उत्तर :- बाली और सुग्रीव देखने में एक जैसे थे, बिना पहचान के बाण सुग्रीव के लग सकता था। राम अपने मित्र को खोना नहीं चाहते थे।
प्रश्न :- दोबारा किस प्रकार सुग्रीव ने बाली को ललकारा?
उत्तर :- लक्ष्मण ने सुग्रीव को समझाया और राम ने सुग्रीव को कहा कि इस बार बाली को पहचानने में गलती नहीं होगी?
प्रश्न :- बाली को किनसे बाहर जाने से रोका?
उत्तर :- बाली की पत्नी तारा ने।
प्रश्न :- राम ने बाली का वध किस प्रकार किया?
उत्तर :- बाली ने हाथ हवा में उठाया। मुट्ठी भिंची हुई थी। वह एक घूँसे से सुग्रीव का काम तमाम कर देता। तभी राम का बाण उसकी छाती में लगा। वह लड़खड़ाकर गिर पड़ा।
प्रश्न :- राम के कहने पर किसे किष्किंधा का युवराज घोषित किया गया?
उत्तर :- बाली के पुत्र अंगद को।
प्रश्न :- राम ने सुग्रीव को गद्दी पर बैठाने के बाद क्या कहकर पुकारा?
उत्तर :- वानरराज।
प्रश्न :- सुग्रीव ने वानरसेना एकत्र करने का काम किसे दिया?
उत्तर :- सेनापति नल को।
प्रश्न :- सुग्रीव को राम को दिया वचन किस प्रकार याद आया?
उत्तर :- लक्ष्मण के धनुष की टंकार से।
प्रश्न :- किसके पीछे भालुओं की सेना थी?
उत्तर :- जामवंत के पीछे।
प्रश्न :- वानरों को कितनी टोलियों में बाँटा गया?
उत्तर :- चार।
प्रश्न :- किसे दक्षिण जाने वाले अग्रिम दल का नेता बनाया गया?
उत्तर :- अंगद को।
प्रश्न :- अंगद के दल में और कौन थे?
उत्तर :- नल, नील और हनुमान।
प्रश्न :- राम ने हनुमान को क्या दिया?
उत्तर :- अँगूठी।
प्रश्न :- राम ने हनुमान को अँगूठी क्यों दी?
उत्तर :- अँगूठी पर राम का चिह्न था। उन्होंने कहा, “जब सीता से भेंट हो तो यह अँगूठी उन्हें दे देना। वे इसे पहचान जाएँगी। समझ जाएँगी तुम्हें मैंने भेजा है। तुम मेरे दूत हो।”
प्रश्न :- किसे देखकर वानर सेना का साहस जवाब दे गया?
उत्तर :- विशाल समुद्र को देखकर।
प्रश्न :- वानर सेना को किसने बताया कि सीता लंका में है?
उत्तर :- जटायु के भाई संपाति ने।
प्रश्न :- किसके कहने पर हनुमान को लंका की ओर भेजा गया?
उत्तर :- जामवंत के।
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