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चिट्ठियों की अनूठी दुनिया (पाठ का सार)
शब्दार्थ : अजीबो-गरीब – अनोखा। एसएमएस – लघु संदेश सेवा। सिलसिला – आरंभ होना, रास्ता खुलना। अहमियत – महत्त्व। हरकारा – दूत, डाकिया, संदेश पहुँचाने वाला। आवाजाही – आना-जाना। तह – गहराई। प्रशस्ति पत्र – प्रशंसा पत्र। मुस्तैद – तत्पर। दस्तावेज – प्रमाण संबंधी कागजात, प्रमाण पत्र। गुडविल – सुनाम, अच्छी छवि। हैसियत – दरजा। आलीशान – शानदार। ढाँणी – अस्थाई निवास, कच्चे मकानों की बस्ती जो गाँव से कुछ दूर बनी हो।
इस पाठ में लेखक आज का युग वैज्ञानिक युग में भी “पत्र” महत्ता को सिद्ध करता है। मनुष्य के पास संचार के अन्य साधन होते हुए भी वह पत्रों का सहारा जरूर लेता है। पत्र को तेलगू में उत्तरम, कन्नड़ में कागद, संस्कृत में पत्र, उर्दू में खत, तमिल में कडिद कहा जाता है। आज भी कई लोग अपने पुरखों के पत्र सहेजकर रखे हुए हैं। हमारे सैनिक अपने घर वालों के पत्रों का इंतजार बड़ी बेसब्री से करते हैं। आज भी सिर्फ भारत में प्रतिदिन साढ़े चार करोड़ पत्र डाक में डाले जाते हैं। पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भी पत्र के महत्त्व को माना है। लेखक कहते हैं कि २०वीं शताब्दी में पत्र केवल संचार का साधन ही नहीं अपितु एक कला मानी गई है। इसे पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया तथा कई पत्र लेखन प्रतियोगिताएँ आयोजित की गई। लेखक का मानना है इस संसार में कोई ऐसा मनुष्य नहीं होगा जिसने कभी किसी को पत्र न लिखा हो। पत्र सिर्फ एक संचार माध्यम ही नहीं हैं। ये मार्गदर्शक की भूमिका भी निभाते हैं। मोबाइल से प्राप्त एसमएस तो लोग मिटा देते हैं परन्तु पत्र हमेशा सहेज कर रखते हैं। आज भी संग्रहालय में महान हस्तियों के पत्र शोभा बने हुए हैं। महात्मा गांधी के पास पूरे विश्व से पत्र आते थे और वे उनका जवाब तुरंत लिख देते थे। “रवीन्द्रनाथ टैगोर” और “महात्मा गांधी” के पत्र व्यवहार को ‘महात्मा और कवि’ के शीर्षक से प्रकाशित किया गया है। भारत में पत्र व्यवहार की परम्परा बहुत पुरानी है। सरकारी की अपेक्षा घरेलु पत्र मुख्य भूमिका निभाते हैं क्योकि ये आम लोगो को जोड़ने का काम करते हैं। चाहे गरीब हो या अमीर सभी को अपने प्रियजनों से प्राप्त पत्र का इन्तजार रहता है। गरीब बस्ती में तो मनीऑर्डर लेकर आने वाले डाकिए को लोग देवता समझते हैं। अंत में वे कहते हैं कि अत्यधिक संचार साधनों के होने के बावजूद भी पत्र आज भी बहुत महत्वपूर्ण हैं।
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चिट्ठियों की अनूठी दुनिया
(प्रश्न-उत्तर)
पाठ से
प्रश्न – पत्र जैसा संतोष फोन या एसएमएस का संदेश क्यों नहीं दे सकता?
उत्तर – पत्र जो काम कर सकते हैं, वह संचार का आधुनिकतम साधन नहीं करसकता है। पत्र जैसा संतोष फोन या एसएमएस का संदेश कहाँ दे सकता है। पत्र
एक नया सिलसिला शुरू करते हैं और राजनीति, साहित्य तथा कला के क्षेत्रें में तमाम विवाद और नयी घटनाओं की जड़ भी पत्र ही होते हैं। दुनिया का तमाम साहित्य पत्रें पर केंद्रित है और मानव सभ्यता के विकास में इन पत्रें ने अनूठी भूमिका निभाई है।
प्रश्न – पत्र को खत, कागद, उत्तरम्, जाबू, लेख, कडिद, पाती, चिट्ठी इत्यादि कहा जाता है। इन शब्दों से संबंधित भाषाओं के नाम बताइए।
उत्तर – पत्रें का भाव सब जगह एक-सा है, भले ही उसका नाम अलग-अलग हो। पत्र को उर्दू में खत, संस्कृत में पत्र, कन्नड़ में कागद, तेलुगु में उत्तरम्, जाबू और लेख तथा तमिल में कडिद कहा जाता है।
प्रश्न – पत्र लेखन की कला के विकास के लिए क्या-क्या प्रयास हुए? लिखिए।
उत्तर – पिछली शताब्दी में पत्र लेखन ने एक कला का रूप ले लिया। डाक व्यवस्था के सुधार के साथ पत्रें को सही दिशा देने के लिए विशेष प्रयास किए गए। पत्र संस्कृति विकसित करने के लिए स्कूली पाठ्यक्रमाेंं में पत्र लेखन का विषय भी शामिल किया गया। भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में ये प्रयास चले और विश्व डाक संघ ने अपनी आरे से भी काफ़ी प्रयास किए गए।
प्रश्न – पत्र धरोहर हो सकते हैं लेकिन एसएमएस क्यों नहीं? तर्क सहित अपना विचार लिखिए।
उत्तर – आज देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो अपने पुरखों की चिट्ठियों को सहेज और सँजोकर विरासत के रूप में रखे हुए हों। पत्रों को तो हम सहजेकर रख लेते हैं पर एसएमएस संदेशों को हम जल्दी ही भूल जाते हैं। कितने संदेशों को हम सहेजकर रख सकते हैं। तमाम महान हस्तियों की तो सबसे बड़ी धरोहर उनके द्वारा लिखे गए पत्र ही हैं। भारत में इस श्रेणी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को सबसे आगे रखा जा सकता है। दुनिया के तमाम संग्रहालय में जानी मानी हस्तियों के पत्रों का अनूठा संकलन भी हैं। इसलिए कहा जाता है कि पत्र धरोहर हो सकते हैं लेकिन एसएमएस नहीं।
प्रश्न – क्या चिट्ठियों की जगह कभी फैक्स, ई-मेल, टेलीफोन तथा मोबाइल ले सकते हैं?
उत्तर – चिट्ठियों की जगह कभी फैक्स, ई-मेल, टेलीफ़ोन तथा मोबाइल नहीं ले सकते है क्योंकि जितना प्रेम और अपनापन हमें पत्रों में लिखित एक-एक शब्द द्वारा मिलता है वह इन विकसित संचार साधनों द्वारा नहीं।
पाठ से आगे
प्रश्न -किसी के लिए बिना टिकट सादे लिफ़ाफ़े पर सही पता लिखकर पत्र बैरंग भेजने पर कौन-सी कठिनाई आ सकती है? पता कीजिए।
उत्तर – सही पता न लिखकर पत्र भेजने पर पत्र को प्राप्त करने वाले व्यक्ति को टिकट की राशि चुकानी होगी तभी उसे पत्र दिया जाएगा अन्यथा पत्र वापस चला जाएगा।
प्रश्न -पिन कोड भी संख्याओं में लिखा गया एक पता है, कैसे?
उत्तर – पिन कोड का पूरा रूप है – पोस्टल इंडेक्स नंबर। यह 6 अंको का होता है। हर एक का खास स्थानीय अर्थ होता है, जैसे −
पहला अंक राज्य; दूसरा व तीसरा अंक उपक्षेत्र; चौथा, पाँचवाँ और छठा अंक डाकघर का होता है। इसलिए पिन कोड भी संख्याओं में लिखा गया एक पता है।
प्रश्न – ऐसा क्यों होता था कि महात्मा गांधी को दुनिया भर से पत्र ‘महात्मा गांधी-इंडिया’ पता लिखकर आते थे?
उत्तर – महात्मा गांधी अपने समय के सर्वाधिक लोकप्रिय व्यक्ति थे। वे ज्यादातर देश भ्रमण पर रहते थे इसलिए पत्र लिखने वाला ‘महात्मा गांधी-इंडिया’ लिखकर पत्र भेजता था। गाँधी जी देश के जिस भी भाग में होते उनको पत्र अवश्य मिल जाता था।
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अनुमान और कल्पना
प्रश्न – रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविता ‘भगवान के डाकिए’ आपकी पाठ्यपुस्तक में है। उसके आधार पर पक्षी और बादल को डाकिए की भांति मानकर अपनी कल्पना से लेख लिखिए।
उत्तर – ‘भगवान के डाकिए’ रामधारी सिंह दिनकर द्वारा लिखी गई श्रेष्ठ रचना है। इसमें दिनकर ने बादल और पक्षी को भगवान के डाकिए के रूप में चित्रित किया है। बादल और पक्षी वास्तव में अलग-अलग होते हुए भी दोनों में आंतरिक समानता है। बादल और पक्षी दोनों एक देश से दूसरे देश में आते-जाते रहते हैं। इन्हें प्रकृति का संदेशवाहक भी कहा गया है। इनके द्वारा लाए गए संदेश को न हम पढ़ सकते हैं और न हम समझ सकते हैं लेकिन पेड़-पौधे, पहाड़ आदि अपने-अपने तरीके से उसके संदेश को सुनते हैं और समझते है।
प्रश्न – संस्कृत साहित्य के महाकवि कालिदास ने बादल को संदेशवाहक बनाकर ‘मेघदूत’ नाम का काव्य लिखा है। ‘मेघदूत’ के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर – ‘मेघदूत’ कालिदास द्वारा संस्कृत में रचित खंडकाव्य है। इसमें यक्ष और यक्षिणी की प्रेम कथा है। यक्ष अलकापुरी से निष्कासित होने पर रामगिरि पर्वत पर अपना निवास बनाता है। वर्षा ऋतु में उसे अपनी प्रेमिका यक्षिणी की याद आती है। वह जानता है कि अब मैं अलकापुर नहीं जा सकूँगा। अतः वह बादल को रामगिरी से अलकापुर तक के विस्तृत रास्ते को बताकर अपने प्रेम संदेश को यक्षिणी को देने के लिए कहता है।
प्रश्न – पक्षी को संदेशवाहक बनाकर अनेक कविताएँ एवं गीत लिखे गए हैं। एक गीत है-‘जा-जा रे कागा विदेशवा, मेरे पिया से कहियो संदेशवा’। इस तरह के तीन गीतों का संग्रह कीजिए। प्रशिक्षित पक्षी के गले में पत्र बाँधकर निर्धारित स्थान तक पत्र भेजने का उल्लेख मिलता है। मान लीजिए आपको एक पक्षी को संदेशवाहक बनाकर पत्र भेजना हो तो आप वह पत्र किसे भेजना चाहेंगे और उसमें क्या लिखना चाहेंगे।
उत्तर – छात्र स्वयं करें।
प्रश्न – केवल पढ़ने के लिए दी गई रामदरश मिश्र की कविता ‘चिट्ठियाँ’ को ध्यानपूर्वक पढ़िए और विचार कीजिए कि क्या यह कविता केवल लेटर बॉक्स में पड़ी निर्धारित पते पर जाने के लिए तैयार चिट्ठियों के बारे में है? या रेल के डिब्बे में बैठी सवारी भी उन्हीं चिट्ठियों की तरह हैं जिनके पास उनके गंतव्य तक का टिकट है। पत्र के पते की तरह और क्या विद्यालय भी एक लेटर बाक्स की भाँति नहीं है जहाँ से उत्तीर्ण होकर विद्यार्थी अनेक क्षेत्रें में चले जाते हैं? अपनी कल्पना को पंख लगाइए और मुक्त मन से इस विषय में विचार-विमर्श कीजिए।
उत्तर – रामदरश मिश्र द्वारा रचित कविता ‘चिट्ठियाँ’ वर्तमान मानव पर तीखा व्यंग्य करती है। कविता आकार छोटी होते हुए भी बहुत से गूढ़ रहस्यों को समाए हुए है। कवि ने पत्रों की तुलना मानव से की है। लेटर बॉक्स में किसी के दुख के पत्र होते हैं किसी के सुख के पत्र होते हैं। वे पत्र आपस में बातें नहीं करते एक-दूसरे की भावनाओं को वे नहीं समझते। ठीक इसी प्रकार आज का मानव भी अपने-अपने में मगन है। यह कविता रेल में सफर करने वाले लोगों तथा विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर भी बिल्कुल सटीक बैठती है। चिट्ठियों की तरह विद्यार्थी भी अलग-अलग स्थानों से आते हैं और विद्या प्राप्त करके अपने-अपने स्थान पर चले जाते हैं।
भाषा की बात
प्रश्न -किसी प्रयोजन विशेष से संबंधित शब्दों के साथ पत्र शब्द जोड़ने से कुछ नए शब्द बनते हैं, जैसे-प्रशस्ति पत्र, समाचार पत्र। आप भी पत्र के योग से बननेवाले दस शब्द लिखिए।
उत्तर –
- प्रेम पत्र
- सरकारी पत्र
- प्रार्थना पत्र
- त्याग पत्र
- नियुक्ति पत्र
- मान पत्र
- बधाई पत्र
- संधि पत्र
- निमंत्रण पत्र
- आवेदन पत्र
प्रश्न -‘व्यापारिक’ शब्द व्यापार के साथ ‘इक’ प्रत्यय के योग से बना है। इक प्रत्यय के योग से बननेवाले शब्दों को अपनी पाठ्यपुस्तक से खोजकर लिखिए।
उत्तर –
- प्रारंभिक
- माध्यमिक
- व्यवसायिक
- साहित्यिक
- सांस्कृतिक
- स्वाभाविक
- दैनिक
- प्राकृतिक
- पारिश्रमिक
- जैविक
- ऐतिहासिक
- पौराणिक
- आर्थिक
प्रश्न – दो स्वरों के मेल से होनेवाले परिवर्तन को स्वर संधि कहते हैं जैसे-रवीन्द्र = रवि + इन्द्र। इस संधि में इ + इ = ई हुई है। इसे दीर्घ संधि कहते हैं। दीर्घ स्वर संधि के और उदाहरण खोजकर लिखिए। मुख्य रूप से स्वर संधियाँ चार प्रकार की मानी गई हैं-दीर्घ, गुण, वृद्धि और यण। ”स्व या दीर्घ अ, इ, उ के बाद ”स्व या दीर्घ अ, इ, उ, आ आए तो ये आपस में मिलकर क्रमशः दीर्घ आ, ई, ऊ हो जाते हैं, इसी कारण इस संधि को दीर्घ संधि कहते हैं जैसे-संग्रह + आलय = संग्रहालय, महा + आत्मा = महात्मा। इस प्रकार के कम-से-कम दस उदाहरण खोजकर लिखिए और अपनी शिक्षिका/शिक्षक को दिखाइए।
उत्तर –
- दीप+अवली=दीपावली
- पीत+अंबर=पीतांबर
- देव+आलय =देवालय
- विद्या+अर्थी=विद्यार्थी
- विद्या+आलय=विद्यालय
- हरि+ईश=हरीश
- सु+उक्ति=सूक्ति
- सती+ईश=सतीश
- दया+आनन्द=दयानन्द
- हिमालय = हिम + आलय
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