देवसेना का गीत (दक्षता)

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देवसेना का गीत (दक्षता)

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1. कथन (A): देवसेना के गीतों में करुणा का स्वर प्रधान है।

कारण (R): उसने अपने परिवार और देश के लिए बहुत बड़े बलिदान दिए हैं।

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2. कथन (A): कविता में 'आँसू' देवसेना की हार व निराशा के प्रतीक हैं।

कारण (R): वह अपनी परिस्थितियों और नियति से पूरी तरह हार मान चुकी है।

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3. कथन (A): देवसेना अपनी 'मधुकरियों की भीख' लुटा देना चाहती है।

कारण (R): उसने अपना सारा जीवन दूसरों की सेवा में अर्पित कर दिया था।

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4. कथन (A): 'विजया' देवसेना की प्रतिद्वंद्वी जैसी थी।

कारण (R): स्कंदगुप्त विजया के प्रति आकर्षित था।

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5. कथन (A): 'लगी सतृष्ण दीठ थी सबकी' में देवसेना की लोकप्रियता की बात है।

कारण (R): वह मालवा की राजकुमारी होने के नाते सबकी आकर्षण का केंद्र थी।

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6. कथन (A): देवसेना का गीत छायावादी कविता का उत्तम उदाहरण है।

कारण (R): इसमें व्यक्तिनिष्ठता, वेदना और प्रकृति का मानवीकरण किया गया है।

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7. कथन (A): देवसेना ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में 'आशा' को विदा दे दी है।

कारण (R): वह स्कंदगुप्त के प्रेम में पूरी तरह सफल हो गई थी।

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8. कथन (A): कविता में 'श्रमित स्वप्न की मधुमाया' पद देवसेना की वर्तमान स्थिति को दर्शाता है।

कारण (R): देवसेना जीवन के संघर्षों से थक चुकी है और अब केवल विश्राम चाहती है।

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9. कथन (A): स्कंदगुप्त द्वारा अंत में प्रेम निवेदन करने पर देवसेना उसे स्वीकार कर लेती है।

कारण (R): देवसेना आजीवन स्कंदगुप्त से ही प्रेम करती रही थी।

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10. कथन (A): देवसेना ने अपनी हार को स्वीकार कर प्रलय से लोहा लेना छोड़ दिया है।

कारण (R): वह कहती है कि 'प्रलय स्वयं टकराता है' और वह निर्बल है।

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