लघुकथा लेखन » लघुकथा लेखन उदाहरण

लघुकथा – एकता में बल

एक था किसान। उसके चार लड़के थे। पर उन लड़कों में मेल नहीं था। वे आपस में बराबर लड़ते-झगड़ते रहते थे। एक दिन किसान बहुत बीमार पड़ा। जब वह मृत्यु के निकट पहुँच गया, तब उसने अपने चारों लड़कों को बुलाया और मिल-जुलकर रहने की शिक्षा दी। किन्तु लड़कों पर उसकी बात का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। तब किसान ने लकड़ियों का गट्ठर माँगवाया और लड़कों को तोड़ने को कहा। किसी से वह गट्ठर न टूटा। फिर, लकड़ियाँ गट्ठर से अलग की गयीं। किसान ने अपने सभी लड़कों को बारी-बारी से बुलाया और लकड़ियों को अलग-अलग तोड़ने को कहा। सबने आसानी से लकड़ियों को तोड़ दिया। अब लड़कों की आँखें खुलीं। तभी उन्होंने समझा कि आपस में मिल-जुलकर रहने में कितना बल है।

संकेत –
(दो भाई घर में अकेले, फाइल में आतंकियों की जानकारी, आतंकियों का घर में घुसना, फ़ाइल ढूंढ़ना, कमरे में बंद, आतंकी गिरफ्तार)

चतुर अर्जुन
एक दिन अर्जुन और उसका छोटा भाई करण दोनों घर में अकेले थे। उनके पिताजी एक पुलिस अधिकारी थे। वे एक लाल रंग की फाइल घर लाए थे। उसमें सभी कुख्यात आतंकवादियों के बारे में जानकारी थी।अर्जुन जानता था कि पापा ने वह फाइल एक अलमारी में सुरक्षित रखी हुई है। अर्जुन और करण खेल रहे थे कि तभी दो आतंकवादी उनके घर में घुस आए और बोले, “लाल फाइल कहाँ है?” अर्जुन बड़ा चालाक था।वह बोला, “शयनकक्ष की अलमारी में ऊपर रखी गई है। मैं वहाँ तक नहीं पहुँच सकता।” दोनों आतंकवादी लाल फाइल को हासिल करने के लिए उस कमरे में गए। जब वे अलमारी में फाइल ढूँढ रहे थे, तब अर्जुन ने धीरे-से उस कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया और पिताजी को भी फोन कर दिया जल्दी ही उसके पिताजी पुलिस लेकर वहाँ पहुँच गए।दोनों आतंकवादियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इस प्रकार अर्जुन ने अपनी चतुराई से दोनों आतंकवादियों को पकड़वा दिया। सभी ने उनकी खूब सराहना की। शिक्षा – सूझ-भूझ से किसी भी मुसीबत से निपटा जा सकता है।

2. संकेत –
(बारिश का आभाव, एक भेड़िया, चरागाह में भेड़ों का झुंड, सारा पानी भी पी जाना, भेड़ें वहाँ से भाग गई)

भेड़िए की योजना
एक बार पूरे देश में सूखा पड़ गया। बारिश के अभाव में सभी नदी-नाले सूख गए। कहीं पर भी अन्न का एक दाना नहीं उपजा। बहुत से जानवर भूख और प्यास से मर गए। पास ही के जंगल में एक भेड़िया रहता था।
उस दिन वह अत्यधिक भूखा था। भोजन न मिलने की वजह से वह बहुत दुबला हो गया था। एक दिन उसने जंगल के पास स्थित चरागाह में भेड़ों का झुंड देखा। चरवाहा उस समय वहाँ पर नहीं था।
वह अपनी भेड़ों के लिए पीने के पानी की बाल्टियाँ भी छोड़कर गया था। भेड़ों को देखकर भेड़िया खुश हो गया और सोचने लगा, ‘मैं इन सब भेड़ों को मारकर खा जाऊँगा और सारा पानी भी पी जाऊँगा।
फिर वह उनसे बोला, “दोस्तो, मैं अत्यधिक बीमार हूँ और चलने-फिरने में असमर्थ हूँ। क्या तुम में से कोई मुझे पीने के लिए थोड़ा पानी दे सकता है।” उसे देखकर भेड़ें सतर्क हो गई। तब उनमें से एक भेड़ बोली,“क्या तुम हमें बेवकूफ समझते हो? हम तुम्हारे पास तुम्हारा भोजन बनने के लिए हरगिज नहीं आएँगे।” इतना कहकर भेड़ें वहाँ से भाग गई। इस प्रकार भेड़ों की सतर्कता के कारण भेड़िए की योजना असफल हो गई और बेचारा भेड़िया बस हाथ मलता ही रह गया।
शिक्षा – बुद्धि सबसे बड़ा धन है।

3. संकेत – (आलसी लड़का, पैसों से भरा एक थैला, बिना प्रयास के ही इतने सारे पैसे, व्यर्थ खर्च, कार्य करने की कोई आवश्यकता ही नहीं, कद्र और उपयोगिता)

मेहनत की कमाई
सोनू एक आलसी लड़का था। वह अपना समय यूँ ही आवारागदी करने में व्यतीत करता था। इस कारण वह हमेशा कार्य करने से जी चुराता था। एक दिन उसे पैसों से भरा एक थैला मिला।
वह अपने भाग्य पर बहुत खुश हुआ। वह यह सोच-सोचकर खुश हो रहा था कि उसे मिल गए। सोनू ने कुछ पैसों से मिठाई खरीदी, कुछ पैसों से कपड़े व अन्य सामान खरीदा।
इस प्रकार उसने पैसों को व्यर्थ खर्च करना प्रारंभ कर दिया। तब उसकी माँ बोली, “बेटा, पैसा यूँ बर्बाद न करो। इस पैसे का उपयोग किसी व्यवसाय को शुरू करने में करो।” सोनू बोला, “माँ मेरे पास बहुत पैसा है।
इसलिए मुझे कार्य करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है।” धीरे-धीरे सोनू ने सारा पैसा खर्च कर दिया अब उसके पास एक फूटी कौड़ी भी नहीं थी। इस तरह वह एक बार फिर अपनी उसी स्थिति में आ गया। सोनू को एहसास हुआ कि यदि उसने वह धन परिश्रम से कमाया हुआ होता तो उसने अवश्य उसकी कद्र और उपयोगिता समझी होती।
शिक्षा – धन की उपयोगिता तभी समझ आती है जब वह मेहनत से कमाया हुआ हो।

4. संकेत – (आश्रम, नटखट शिष्य, दीवार फाँदना, उसके गुरुजी यह बात जानते थे, दीवार पर सीढ़ी लगी दिखाई दी, नीचे उतरने में मदद, गुरुजी के प्रेमपूर्ण वचन, गलती के लिए क्षमा)

सबक
एक समय की बात है। एक आश्रम में रवि नाम का एक शिष्य रहता था। वद बहुत अधिक नटखट था। वह प्रत्येक रात आश्रम की दीवार फाँदकर बाहर जाता था परन्तु उसके बाहर जाने की बात कोई नहीं जानता था।
सुबह होने से पहले लौट आया। वह सोचता था कि उसके आश्रम से घूमने की बात कोई नहीं जानता लेकिन उसके गुरुजी यह बात जानते थे। वे रवि को रंगे हाथ पकड़ना चाहते थे। एक रात हमेशा की तरह रवि सीढ़ी पर चढ़ा और दीवार फॉदकर बाहर कूद गया।
उसके जाते ही गुरुजी जाग गए। तब उन्हें दीवार पर सीढ़ी लगी दिखाई दी। कुछ घंटे बाद रवि लौट आया और अंधेरे में दीवार पर चढ़ने की कोशिश करने लगा। उस वक्त उसके गुरुजी सीढ़ी के पास ही खड़े थे। उन्होंने रवि की नीचे उतरने में मदद की और बोले, “बेटा, रात में जब तुम बाहर जाते हो तो तुम्हें अपने साथ एक गर्म साल अवश्य रखनी चाहिए।
गुरुजी के प्रेमपूर्ण वचनों का रवि पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने अपनी गलती के लिए क्षमा माँगी। साथ ही उसने गुरु को ऐसी गलती दोबारा न करने का वचन भी दिया।
शिक्षा – प्रेमपूर्ण वचनों का सबक जिंदगी भर याद रहता है।

5.
संकेत – (पालतु चिड़िय, ताजा पानी और दाना, चालाक बिल्ली डॉक्टर का वेश धारण कर वहाँ पहुँची, स्वास्थ्य परीक्षण, बिल्ली की चाल को तुरंत समझ गईं, दुश्मन बिल्ली, मायूस होकर बिल्ली वहाँ से चली गई)

चालाक चिड़िया
एक व्यक्ति ने अपने पालतु चिड़ियों के लिए एक बड़ा-सा पिंजरा बनाया उस पिंजरे के अंदर चिड़िया आराम से रह सकती थीं। वह व्यक्ति प्रतिदिन उन चिड़ियों को ताजा पानी और दाना देता।
एक दिन उस व्यक्ति की अनुपस्थिति में एक चालाक बिल्ली डॉक्टर का वेश धारण कर वहाँ पहुँची और बोली, “मेरे प्यारे दोस्तो पिंजरे का दरवाजा खोलो। मैं एक डॉक्टर हूँ और तुम सब के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए यहाँ आई हूँ।”
समझदार चिड़ियाएँ बिल्ली की चाल को तुरंत समझ गईं। वे उससे बोली, “तुम हमारी दुश्मन बिल्ली हो। हम तुम्हारे लिए दरवाजा हरगिज नहीं खोलेंगे। यहाँ से चली जाओ।” तब बिल्ली बोली,“नहीं, नहीं। मैं तो एक डॉक्टर हूँ। तुम मुझे गलत समझ रहे हो। मैं तुम्हें कोई हानि नहीं पहुँचाऊँगी। कृपया दरवाजा खोल दो।” लेकिन चिड़िया उसकी बातों में नहीं आई। उन्होंने उससे स्पष्ट रूप से मना कर दिया। आखिरकार मायूस होकर बिल्ली वहाँ से चली गई।
शिक्षा – समझदारी किसी भी मुसीबत को टाल सकती है।

Laghu katha lekhan FAQs

Q1 लघु कथा लेखन क्या है ?
उतर – लघुकथा लेखन गद्य साहित्य की सबसे रोचक विधा है। यह विधा अपने एकांकी स्वरूप में किसी भी एक विषय, एक घटना या एक क्षण पर आधारित होती है। जो अपने सीमित दायरे में ही स्वतः पूर्ण एवं प्रभावशाली होते हैं।

Q2 लघु कथा के २ उदाहरण दीजिये।
उतर – लघु कथा के दो उदाहरण निम्नलिखित है।

i. शीर्षक के आधार पर लघु कथा
शीर्षक – अभ्यास की शक्ति
लघु कथा-
प्राचीन भारत में एक बालक था। वह पढ़ाई-लिखाई में बहुत कमजोर था। जब वह पाँच वर्ष का था, तभी वह गुरुकुल शिक्षा के लिए आ गया। दस वर्ष बीत जाने के बाद भी वह आगे नहीं बढ़ पाया। सभी साथी उसका मजाक उड़ाते हुए उसे वरदराज, (बैलों का राजा) कहा करते थे। एक दिन गुरु जी ने उसे अपने पास बुलाया और कहा, “बेटा वरदराज” तुम किसी और काम में ज्यादा सक्षम हो सकते हो, इसलिए अपना समय नष्ट मत करो और घर जाओ। कुछ और काम करो।” गुरु जी की बात से वरदराज को बहुत ही दुख पहुँचा। उसने विद्या विहीन होने से जीवन को खत्म करना बेहतर समझा। यह गुरुकुल से चला गया और आत्महत्या करने का उपाय सोचने लगा। रास्ते में उसे एक कुआं दिखाई दिया। वहाँ महिलाएँ रस्सी से पानी निकाल रही थी। वह वहीं बैठ गया। तब उसने देखा कि रस्सी के आने-जाने के कारण पत्थर पर निशान पड़ गए हैं। वरदराज ने सोचा कि जब इतना कठोर पत्थर, कोमल रस्सी के बार-बार रगड़ने से घिस सकता है, तो परिश्रम करने से मुझे विद्या क्यों नहीं प्राप्त हो सकती? उसने आत्महत्या का विचार त्याग दिया और गुरुदेव के पास लौट आया। उसने गुरुदेव से कुछ दिन और रखकर शिक्षा देने को प्रार्थना की। सरल हृदय से गुरुदेव राजी हो गए। अब वरदराज ने मन लगाकर अध्ययन करना आरंभ किया। उसमें ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा इतनी प्रबल हो गई थी कि उसे न अपने खाने-पीने का ध्यान रहता और न ही समय का।
यही वरदराज आगे चलकर संस्कृत के महान विद्वान बनें। लोगों को संस्कृत आसानी से समझ में आए इस बात को ध्यान में रखकर उन्होंने “लघु सिद्धांत कौमुदी’ की रचना की, जो संस्कृत का महान ग्रंथ है। यह ग्रंथ पाणिनि के व्याकरण का संक्षिप्त सार है। वरदराज की कहानी से निम्नलिखित लोकोक्ति प्रचलित हो गई जो कहानी की शिक्षा को चरितार्थ करती है-

करत-करत अभ्यास के जड्मति होत सुजाना
रसरी आवत-जात ते, सिल पर परत निसान॥

शिक्षा- अभ्यास सफलता का मूलमंत्र है।

ii. संकेत-बिंदु के आधार पर लघु कथा
संकेत
एक जंगल में एक शेर रहता था। एक दिन दोपहर को वह एक पेड़ के नीचे आराम कर रहा था। अचानक एक
चूहा उसके ऊपर आकर कूदने लगा। इससे शेर की नींद टूट गई। अपने ऊपर चूहे को देखकर वह बहुत क्रोधित हुआ और गरजकर बोला-“ तेरी यह हिम्मत! मैं अभी तुझे जान से मार दूँगा।”
बेचारा चूहा भय से काँपने लगा। उसने शेर से विनती की ………….।
लघु कथा-
एक जंगल में एक शेर रहता था। एक दिन दोपहर को वह एक पेड़ के नीचे आराम कर रहा था। अचानक एक
चूहा उसके ऊपर आकर कूदने लगा। इससे शेर की नींद टूट गई। अपने ऊपर चूहे को देखकर वह बहुत क्रोधित हुआ और गरजकर बोला-“ तेरी यह हिम्मत! मैं अभी तुझे जान से मार दूँगा।”
बेचारा चूहा भय से काँपने लगा। उसने शेर से विनती की-“ महाराज, मुझे मत मारिए। मुझे छोड़ दीजिए। वैसे तो मैं बहुत छोटा और दुर्बल हूँ, मगर मैं वादा करता हूँ कि आपका एहसान जीवन भर न भूलूँगा। कभी मौका मिला तो आपकी मदद अवश्य करूँगा।” उसकी बात पर शेर हँसते हुए बोला-“तुम जैसा बहुत ही कमजोर और छोटा जीव, मेरी क्या मदद करेगा? चलो तुम कह रहे हो तो मैं तुम्हें माफ करता हूँ।” यह कहकर शेर ने चूहे को छोड़ दिया। एक दिन की बात है, किसी शिकारी ने जंगल में जाल बिछा रखा था। शेर शिकार की तलाश में जंगल में भटक रहा था कि शिकारी के जाल में फँस गया। घबराकर वह दहाड़ने लगा। मगर जाल बहुत मजबूत था। बेचारे शेर की एक न चली। जाल तोड़कर बाहर निकलना उसके लिए संभव नहीं था। चूहे ने दूर से शेर की दहाड़ सुनी तो वह भागकर शेर के पास पहुँचा और उसने देखते-ही-देखते उस जाल को कुतर दिया। जाल के कटते ही शेर उससे आज़ाद हो गया। जाल से बाहर आकर शेर ने चूहे का आभार व्यक्त किया और उसे धन्यवाद दिया। फिर वे दोनों शिकारी के आने से पहले वहाँ से चले गए।

शीर्षक – शेर और चूहा
शिक्षा – कभी किसी भी जीव को छोटा और कमजोर नहीं समझना चाहिए। हर प्राणी की कोई-न-कोई उपयोगिता होती है।